
इस फल की पहचान पाली से, पैदावार हो रही कहीं ओर।
कभी पाली शहर के लोर्डिया तालाब के सिंघाड़े अपनी मिठास के लिए पहचाने जाते थे। जब भी सिंघाड़ों की पैदावार होती तो उसका स्वाद चखने की शहरवासियों की ख्वाहिश रहती थी। पिछलेे कुछ साल से बारिश होने के बावजूद सिंघाड़े गायब है।इस साल मानसून की अच्छी बारिश से जिले के लगभग तालाब और बांध पानी से लबालब हो गए। शहर के बीच स्थित लाखोटिया व लोर्डिया तालाब भी पानी से भर गया। पिछले साल बिपरजॉय और इस साल मानसून की अच्छी बारिश से भरे लोर्डिया तालाब में भरे पानी से इस बार सिंघाड़े की पैदावार की आस जगी थी, लेकिन अधूरी ही रह गई। हेमावास गांव के कुछ कीर परिवार लोर्डिया तालाब में सिंघाड़े की बुवाई करते थे। उनका धीरे-धीरे मोह भंग हो गया। इसके चलते पिछले छह साल से सिंघाड़े की पैदावार नहीं हुई।पाली के सिंघाड़े का अनूठा होता है स्वाद
पाली के लोर्डिया तालाब में होने वाले सिंघाड़े पाली के साथ प्रदेश व देश में प्रसिद्ध हैं। इसकी मिठास से पता चल जाता है कि ये पाली के सिंघाड़े हैं। वर्तमान में पाली में बिकने वाले सिंघाडे अजमेर, नसीराबाद, केकड़ी, ब्यावर, रायपुर व गुजरात से आ रहे हैं।



